हजारीप्रसाद द्विवेदी के पत्र

प्रथम खंड

संख्या - 21


IV/ A-2021

शान्तिनिकेतन

26.1.38

पूज्य पंडित जी,

              प्रणाम!

       कृपा-पत्र मिला। मुझे आपका निमंत्रण स्वीकार है। इसी का सुयोग पाकर एक बार आपके दर्शन भी कर सकूँगा। और कई बातों में आपकी सलाह ले सकूँगा। गुरुदेव के संबंध में मेरा भाषण लिखित ही होगा। वही शायद पसंद भी करें। मैं बिना लिखे बोल नहीं सकता। रथी बाबू से आपकी बात कह दी। उन्होंने मुझे स्वीकृति दी है। शेष आने पर। कुशल है।

आपका

हजारी प्रसाद

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© इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र १९९३, पहला संस्करण: १९९४

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प्रकाशक : इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली एव राजकमल प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली