हजारीप्रसाद द्विवेदी के पत्र

प्रथम खंड

संख्या - 49


I V/ A-2048

विश्वभारती पत्रिका

साहित्य और संस्कृति सम्बन्धी

हिन्दी त्रैमासिक

पत्र सं. 25

हिन्दी भवन

शान्ति निकेतन,बंगाल

22.11.41

श्रध्देय पंडितजी,

              सादर प्रणाम!

       कृपा-पत्र पाकर आनन्द हुआ। इस पत्र के साथ एक विज्ञाप्ति भेज रहा हूँ। इससे आपके पत्रिका के उद्देश्यों के संबंध में परिचय प्राप्त होगा। यदि संभव हो तो मधुकर में इसका कुछ अंश छाप दें। और सब कुशल है।

       शिवरात्रि तो अभी बहुत दिन है। इच्छा तो ज़रुर है कि आपसे मिलकर कुछ दिन गप्प मार्रूँ. पर समिति से बार-बार पाथेय लेने में संकोच होता है। इस बार शिवरात्रि नहीं तो किसी और छुट्टी के समय अपनी ओर से ही आऊँगा। और सब ठीक है। अपने स्वास्थ्य का ज़रुर ध्यान रखें। यह अच्छा है कि आपने उसे सुधारने की प्रतिज्ञा कर ली है। बुंदेलखंड में स्वास्थ्य बिगड़ना उचित नहीं है। आशा है अब आप कुछ तगड़े हो चले होंगे।

       मैं काफी स्वस्थ हूँ। बच्चे भी सकुशल हैं। सबका प्रणाम स्वीकार करें।

आपका

हजारी प्रसाद  

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© इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र १९९३, पहला संस्करण: १९९४

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प्रकाशक : इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली एव राजकमल प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली