हजारीप्रसाद द्विवेदी के पत्र

प्रथम खंड

संख्या - 83


IV/ A-2085

शान्तिनिकेतन

दिनांक : 26.9.49

पूज्य पंडित जी,

              सादर प्रणाम!

       कल ही लखनऊ से लौटा हूँ। मसूरी चला गया था। इसलिये देर हो गई। आपके पत्र और ५० रुपये मनीआर्डर मिल गए हैं। अपना लेख और विनोद जी का लेख भी जल्दी भेजूँगा।

       लखनऊ के व्याख्यान अच्छे ही रहे। रामगोपाल जी बराबर मिलते रहे। बहुत प्रसन्न हैं।

       दिव्य पुस्तक पर और कसक पर कुछ लिख कर भेजूँगा। अभी तो १५ दिन के अनेक कार्य जमा हैं उन्हें संभाल रहा हूँ। आपको विस्तृत रुप से लिखूँगा।

       शेष कुशल है।

       आशा है प्रसन्न हैं।

आपका

हजारी प्रसाद द्विवेदी

पुनश्चः श्री दीनबंधु का जीवनचरित मेरे पास आ गया है। उसका आवरणपत्र अर्थात् जिस कागज में बांधकर भेजा गया था वह नहीं मिला। इसलिए समझ नहीं पा रहा हूँ कि पहुँच की सूचना किसे दूँ।

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© इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र १९९३, पहला संस्करण: १९९४

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प्रकाशक : इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली एव राजकमल प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली