Kalakosa

नारी संवाद प्रकल्प

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (इ.गाँ.रा.क.के.). कला और संस्कृति के क्षेत्र में महिलाओं के योगदान को इस महती कार्य के अभिन्न अंग के रूप में देखता है। नारीवाद: लिंग, संस्कृति और सभ्यता नेटवर्क को वर्ष 2002 में महिलाओं की उस संस्कृति की अभिव्यक्ति के मंच के रूप में आरंभ किया गया जिसे इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला और इतिहास की गलत अवधारणा के कारण जो हाशिए पर पड़ी रही या जिसे विरूपित किया गया। नारीवाद कार्यक्रम का लक्ष्य है स्त्रियों की खोई और दबी हुई वाणी को दुबारा प्रतिष्ठित करना, लिंग अध्ययनों के अभिन्न अंग के रूप में नारी के सांस्कृतिक संसाधनों और पारंपरिक शिक्षण प्रणाली की पुनर्समीक्षा एवं उचित संदर्भ प्रदान करना तथा साथ ही हमारी सांस्कृतिक विरासत के निर्माण, संरक्षण और प्रसार में महिलाओं द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका के महत्व को पुनर्प्रतिष्ठित एवं पुनर्मूल्यांकित करना।

2002 में अपने आरंभ से नारीवाद ने अपने दो इन-हाउस परियोजनाओं पर शोध कार्य किया है। कला और कथा, मिथिला में स्त्रियों की कला और अभिव्यक्ति के तहत मधुबनी जिले के गांवों से सभी सामाजिक वर्गों (ब्राह्मण, कायस्थ, दुसाध) की पचास महिला कलाकारों को मानसून के दिनों में पड़ने वाले नाग देवता को समर्पित मधु-श्रावणी पर्व (15 जुलाई-7अगस्त 2006) के अवसर पर एकजुट किया गया। कार्यशाला में इस त्योहार से जुड़े पन्द्रह वृत्तांत, गीत और विधि-विधानों का प्रलेखन किया गया। गुणवती नारी की अवधारणा पर दूसरी कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें महिलाओं ने अपने पौराणिक एवं ऐतिहासिक रोल मॉडलों के बारे में अपने विचार व्यक्त किए जिन्होंने उनके जीवन को प्रभावित किया। इन दो कार्यशालाओं के फलस्वरूप एक पुस्तक के रूप में एक शोध प्रपत्र प्रस्तावित है जिसमें प्रमुख विद्वानों और विख्यात लेखकों के योगदानों की चर्चा होगी।

Nārīvāda – Gender, Culture & Civilization Network

दूसरी परियोजना इमारत: दिल्ली की स्त्री संरक्षिका: रज़िया सुल्तान से मुबारक बेगम तक (1240-1823 ई.) का उद्देश्य है सक्रिय ऐतिहासिक कारक के रूप में स्त्रियों के विषय का अध्ययन करते हुए उनकी पड़ताल। इसका उद्देश्य मंदिरों, किलों, दरगाहों जैसे भौतिक सांस्कृतिक स्थलों; प्रकृति और मानव सेवा से जुड़े स्थलों जैसे उद्यान, कुंज, वीथिका, झील, कुएं, घाट, विश्रामशालाएं, महल आदि के निर्माण में रोल मॉडल महिलाओं के योगदानों की पहचान करना और उनके महत्व को समझना है। इस परियोजना के तहत ऐसे 44 स्मारकों की पहचान की गई जो अब तक उपेक्षित और महत्वहीन स्थिति में थे। प्रख्यात विद्वानों की आधिकारिक रचनाओं की एक व्यापक श्रृंखला के जरिए दृश्य प्रलेखन की व्याख्यायित है। प्राप्तियों पर आधारित एक प्रदर्शनी एवं एक सचित्र कैटलॉग तैयार करने का प्रस्ताव है। तीसरा शोध कार्यक्रम- महिलाओं की दिल्ली: पुरानी दिल्ली से नई दिल्ली तक (1870-1950 ई.) दिल्ली की संस्कृति में महिलाओं के योगदान पर केंद्रित है। प्रलेखन के अंतर्गत हैं संगीत, साहित्य, दस्तकारी, फोटोग्राफी, सिनेमा, पत्रकारिता, नृत्य एवं रंगमंच, सामाज कल्याण, कानून, शिक्षा और अध्यात्म जैसे क्षेत्रों में दिल्ली की महिलाओं के योगदान तथा साथ ही उन महिलाओं के योगदान जिन्होंने आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान दिए।

इस प्रकार का अपने आप में पहला कार्यक्रम ग्रंथ अध्ययनों एवं 3000 ई.पू. से लेकर 2000ई. तक के संस्कृत भाषा में रचित स्त्री साहित्य में शोध का आरंभ कलाकोश में किया गया और इसका संबंध संस्कृत के टीका सहित ग्रंथों के और मूल स्रोत के अनुवाद के प्रकाशन से है। कलाकोश द्वारा कराए गए संस्कृत भाषा में प्रामाणिक शोध को ध्यान में रखते हुए नारीवाद ने संस्कृत भाषा में स्त्रियों के लेखन पर विदुषी परियोजना की शुरुआत की जिसका प्रयास है संस्कृत भाषा में स्त्रियों के उपेक्षित और संपीडित स्वर की खोज कर उसे पुनर्प्रतिष्ठित करना। विदुषी परियोजना के तहत नारीवाद ने 3000 ई.पू. से लेकर 2000ई. तक के संस्कृत भाषा में वैदिक ऋषिकाओं एवं स्त्रियों द्वारा किए गए लेखन की पड़ताल हेतु दो कार्यशालाओं का आयोजन किया। इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है भारत में महिलाओं के बारे में बनाए गए एकालाप युक्त मिथक और पूर्वाग्रहों को दूर करना।

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ऐसे इन-हाउस परियोजनाओं के अतिरिक्त नारीवाद ने भारत में महिला अध्ययन शोध केन्द्रों के साथ सहाभागिता आधारित कई परियोजनाओं की शुरुआत की। इसके अंतर्गत कलकत्ता विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन शोध केन्द्र की सहभागिता में तीन शोध अध्ययन संपन्न किए गए: चिल्का घोष कृत पश्चिम बंगाल की तीन अज्ञात महिला रंगकर्मी (चित्रनिभा चौधरी एवं कमला रायचौधरी); कोंकणा सेनगुप्ता कृत ब्रह्मसमाज की स्त्रियों द्वारा फोटोग्राफीय आलेख तथा डॉ. ऋतुपर्णा बसु कृत सपनों का सीवन, जीविका का सृजन – महिलाओं की कंठा कसीदाकारी पर एक अध्ययन । देशकाल सोसाइटी, नई दिल्ली द्वारा एक अध्ययन मुसहर समुदाय में स्त्री और भात की संस्कृति पर किया गया। एसएनडीटी विश्वविद्यालय, मुम्बई के शोध केन्द्र ने भी एक शोधकार्य महिलाओं के वैकल्पिक आरोग्यकारी व्यवहार पर किया है।

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नारीवाद ऐसे क्षेत्रों में मौलिक अध्ययनों को बढ़ावा देने में गहराई से जुटा है जहां शोधकार्य बहुत कम हुए हैं, जैसे- डॉ. अलका सैकिया का नई ज्ञानमीमांसा पर केन्द्रित शोध ‘उत्तरपूर्व में लिंग तथा शिक्षा प्रणाली’; विकास एवं सृजनात्मकता के स्वरूपों के तालिका-निर्माण के जरिए मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से चुनिंदा महिला जनजातीय कलाकारों के व्यक्तिगत इतिहास दर्ज करने वाला नृजातीयता एवं आजीविका अध्ययन ; महिलाओं, खासकर हाशिए पर सिमटे समुदाय की महिलाओं की राष्ट्रीयता और व्यक्तिगत इतिहास पर महिलाओं के मौखिक इतिहास की पुनर्प्राप्ति। अब तक दो अध्ययन संपन्न किए जा चुके हैं: इन्दिरा मुखर्जी द्वारा चित्रित पहचान: मध्यप्रदेश की तीन महिला जनजातीय कलाकारों के साथ वार्ता और दीप्ति प्रिया मेहरोत्रा द्वारा आजादी की ललक: किसानिन जग्गी देवी की कहानी (प्रकाशित)।
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निम्नलिखित विषयों पर नारीवाद ने निम्नलिखित सात सीडी-रोम प्रस्तुत किए हैं: लेपचा की महिला पुजारियों के साथ एक वार्ता (बप्पा रे की फिल्म); भिक्खुनियों की यात्रा (बप्पा रे की फिल्म); ब्रह्मवादिनी: भारत का प्रथम महिला गुरुकुल; एक सत्याग्रही का संस्मरण (कल्पना सुब्रमण्यम की फिल्म); पंजाब की मिरासन: गायिकी के लिए जनम (शिखा झिंगन की फिल्म); मोक्ष की तलाश में: वृंदावन की वैष्णवी; ग्राम बांग्लार नदीर मोनेर कोथा, महिलाओं द्वारा रचित बंगाली लोक गीत (ऑडियो सीडी)।
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नारीवाद ने पांच एकल पर्चे भी प्रस्तुत किए हैं। उपरोक्त शोध के चुनिंदा अवधारणाओं पर आठ किताबें प्रकाशन की प्रक्रिया में हैं। अपने मौजूदा कार्यक्रम के अंग के रूप में नारीवाद लिंग एवं संस्कृति के क्षेत्र से प्रख्यात विद्वानों के व्याख्यानों का आयोजन करता है संस्कृति के क्षेत्र में महिलाओं के योगदानों से लोगों को परिचित कराने हेतु अभिनव प्रदर्शनियों का भी आयोजन करता है।

स्त्री सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महिलाओं की संस्कृति द्वारा निभाई जाने वाली सकारात्मक भूमिका से दिल्ली के विभिन्न कॉलेजों के छात्र समुदाय को परिचित कराने और उसके प्रति उन्हें संवेदनशील बनाने के लिए नारीवाद उनके साथ सक्रिय वार्ता और परिचर्चा में संलग्न है।
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