सांस्कृतिक अभिलेखागार

कला निधि सांस्कृतिक अभिलेखागार में मुख्य रूप से उन मनीषियों/कलाकारों के निजी संग्रहों का संग्रहण, वर्गीकरण और सूचीकरण किया जाता है जिन्हों ने अपनी-अपनी रुचि के क्षेत्रों/विषयों से जुड़ी सामग्री जुटाने में अपना जीवन अर्पित कर दिया है। कला निधि सांस्कृतिक अभिलेखागार में निम्नालिखित 6 कला-क्षेत्रों के अंतर्गत संग्रह जुटाए जाते हैं और अभिलेखागार के 6 उप-खंडों में इन्हें अलग-अलग वर्गों के अंतर्गत सहेज कर रखा जाता है-

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श्रृव्य-दृश्य् पुस्तवकालय

सांस्कृ्तिक अभिलेखागार में लगभग 2000 वीडियो टेप और 1500 ऑडियो रिकॉर्डिंग भी हैं। ये टेप और स्पूमल, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र द्वारा किए गए विभिन्न श्रृव्य-दृश्य प्रलेखनों के रूप में सहेजे गए हैं। इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के विभिन्न प्रभागों द्वारा शुरू की गई अनुसंधान परियोजनाओं के बारे में तैयार की गई फिल्में भी अभिलेखागार में रखी गई हैं। इनमें से कुछ फिल्मों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिल चुका है। इनमें श्री अरिबम श्याम शर्मा की ‘येल्यू तगोई’ और श्री बप्पा रे की फिल्म ‘वांगाला ऑफ गारोज़’ जैसी फिल्में भी शामिल हैं।

 

सांस्कृतिक अभिलेखागार की सुलभता

प्रत्येक संग्रह को इस प्रकार व्यवस्थित और अनुरक्षित किया गया है कि संग्रहकर्ता के व्यतक्तित्व में झांकने का अवसर मिल सके जिससे कि जिज्ञासु व्यक्ति न केवल संग्रहीत सामग्री को ही देख सके अपितु वह अलग-अलग संग्रहकर्त्ताओं के विशिष्ट अनुरागों की झांकी भी देख सके।
आशा है कि भविष्य में कला-प्रेमियों, समालोचकों और विद्वानों के और अधिक निजी संग्रह इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के सांस्कृतिक अभिलेखागार में स्थान पा सकेंगे; यह अभिलेखागार भारत में अपने ढंग का पहला स्रोत भंडार है।

 

 

24 मार्च, 2015 को सेंट मार्क सीनियर सेकंडरी स्कूल के विद्यार्थियों के शैक्षणिक भ्रमण के फोटोग्राफ और संक्षिप्त रिपोर्ट (पीडीएफ में); ये विद्यार्थी कला केन्द्र के सांस्कृतिक अभिलेखागार में उपलब्ध ‘ब्रूनर’ की चित्रकला, विशेष रूप से ‘टू पिलग्रिम्स‘ नामक उनकी चित्रकृतियों में विशेष दिलचस्पी ले रहे थे।