बृहदेश्वर मंदिर, तंजावुर

ig_bt01तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर चोला कला के बेहतरीन उपलब्धि के रूप में प्रशंसित हैं। इस मंदिर के बनावट की तुलना एक जीवधारी के रूप से की गयी है जिसका प्रत्येक अंश एक पुर्णात्मक रूप से सम्बंधित है। यह केवल एक वास्तुशिल्पीय स्मारक ही नहीं है अपितु यह एक जीवित जिव है जिसने राजाराज प्रथम (1010 ई. बाद) के समय से कई सदियों तक सफलता पूर्वक सामाजिक,आर्थिक तथा सामाजिक जीवन के एक मुख्य केंद्र के रूप में सेवा की है।

इसकी कलात्मक उत्कृष्टता का इसके भागों के बेहतरीन संतुलन तथा इसके पूर्ण रूप,वास्तुकला में, मूर्तिकला,कांस्य कलाकृतियों की चित्रकारी में, मूर्तियों तथा नक्काशी में निहित है। मंदिर की दीवारों पर किया गया शिलालेख कई सदियों की अवधि से अधिक समय की जानकारी का कोष है। केंद्र ने क्षेत्र तंजावुर तथा क्षेत्रम, कोविल, मंदिर के दैहिक तथा वैचारिक अस्तित्व के बहुस्तरीय तथा बहु- आयामी विशिष्ठताओं के अनुसन्धान के लिए कई स्तरों पर इस मंदिर का अध्यन प्रारंभ कर दिया है।

बहुभाषी ग्रन्थ सूचि इस 11 वीं सदी के मंदिर से सम्बंधित है। माध्यमिक स्त्रोतों के आधार पर, 1000 प्रविष्टियों सहित व्याख्यित ग्रन्थ सूचि को सम्पादित किया जा रहा है।

शिलालेख तथा पुरालेखीय सामग्री. इसका मापांक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को सौंपा गया था जो दुर्भाग्य से कार्य पूर्ण नहीं कर सका । हालाँकि उपलब्ध सामग्री के आधार पर विनिबंध तैयार किया जा रहा है ।

वास्तुशिल्पीय तथा पुरातात्विक कारक: इस मंदिर की भूमि की योजना, उन्नयन तथा वर्गों के पैमानों के जांच के द्वारा इसके दस्तावेज बनाने का प्रयत्न किया गया है; मूर्तियों,चित्रकारी तथा मंदिर की आतंरिक तथा बाहरी दीवारों की शिलालेख पर भी कार्य किया गया था। चित्रों तथा तस्वीरों की, “पृथ्वी अनंत काल के लिए” नामक, एक प्रदर्शनी आयोजित की गयी; जिसके पश्चात “बृहदेश्वर: स्मारक तथा जिवंत परंपरा” नामक संगोष्टी का आयोजन किया गया। 637 मूर्तियों के मूर्ति -शास्त्र पर एक विनिबंध तैयार किया जा रहा है ।

भित्तिय चित्रों का फोटोग्राफ सम्बंधित प्रलेखन. गर्भगृह दीवारों पर अनगिनत भित्तिय चित्रों का प्रलेखन 903 स्लाइड में हुआ है । एक विनिबंध की योजना बनाई गयी है ।

मंदिर एक जिवंत उपस्थिति के रूप में. धार्मिक अनुष्ठानों के, जिनके दैनिक, साप्ताहिक, मासिक तथा वार्षिक संपादन किया जाता है, मल्टीमीडिया फार्म में रिकार्डिंग की आवश्यकता है । 1993 में तेवाराम के गायन पर शैव मंदिर के ओडूवार के साथ एक कार्यशाला गठित की गयी, जिसके फलस्वरूप 17 ऑडियो टेप, 33 रील, साक्षात्कार की 28 प्रतिलिपियाँ तथा ओडूवार की 67 फोटोग्राफ उत्पन्न हुई। प्रसिद्द ओडूवार के द्वारा तेवाराम के गायन पर एक मास्टर टेप तथा तेवाराम के भजन पर एक विनिबंध तैयार करने की योजना बनाई गयी है ।

उत्सव के प्रलेखन. 1997 में, मंदिर में महाकुम्भाभिशेक (12 साल बाद) धार्मिक अनुष्ठान का उत्सव मनाया गया । अनुष्ठान के फोटोग्राफ तथा ऑडियो-विडिओ टेप प्राप्त हुए; साथ ही फोटोग्राफ के 3 अल्बम, 17 ऑडियो टेप तथा 42 यू- मेटिक विडिओ टेप भी प्राप्त हुए । इस अनुष्ठान की 90 मिनट की एक फिल्म बनाने की योजना बनाई जा रही है।

मल्टी-मीडिया द्वरा बृहदेश्वर मंदिर का विस्तृत वर्णन। अब तक की एकत्रित सामग्री का उपयोग करके, यू.एन.डी.पी. के तत्वावधान में, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र का आई डी प्रभाग, मंदिर पर एक मल्टी-मीडिया परियोजना की योजना बना रहा है।

The project presents the Brhadisvara temple as a monument but more as a living tradition.

So far, three major monographs namely Tanjavur Brhadisvara : An Architectural Study, Brhadisvara Temple: Form and Meaning  and The Iconography of the Brhadisvara Temple  have been published by IGNCA, as a part of the project. The IGNCA also organised major events in Tamil Nadu (Chennai and Tanjavur). These events are enthusiastically acclaimed as unique and unusual presentations, revolving around the temple and the culture of its region, the people, craftsmen, implementation and music and dance.

The IGNCA designed and developed an interactive multimedia DVD titled ” Tanjavur Brhadisvara Temple ” based on the materials collected. This interactive multimedia DVD presents the content explanation systems on the Bṛhadīśvara temple to intensify cultural learning and visualisation. Through this DVD users can access the sections of the architectural layout, both horizontally and vertically with respective images and little description about each section.

The temple of Bṛhadīśvara includes a great number of iconographic representations. The most important icon in the temple is the huge Lings, the main symbolic object of worship. Distribution of sculptures on the ground and upper floors of the Vimana with description of each of these icons, their reference in the text(s) (through Dhyan shloka) and voiceover of the Dhyan shloka in some cases has been integrated for a better understanding. On the upper floor of the Central sanctum, sculptures are carved on the outside of the inner wall of the Central sanctum, sculptures are carved on the outside of the inner wall of the Vimana in a clock-wise direction. They represent the dance-karanas as described in the Bharata’sNatyashastra. 108 stone blocks were left to carve all the dance-karanas as per the text but, the work stopped after the 81st dance-karana. These images can be explored in the DVD with relevant shloka in the Natyashastra.

The paintings in the passageway of the garbhagriha of the temple are the only remaining examples of Cola paintings that we have today. Panels of the Cola paintings are linked through the storyline, to understand these paintings in their context. They are also grouped in different sections for easy navigation by users.

On the base of main tower, the front great hall, the subsidiary shrines and the enclosure are remarkable documents that record several aspect of the temple: its construction, maintenance and management, land grants. These have been integrated linking their location on the temple plan with translation published by ASI, for each navigation by users. The light these records throw on the rituals and festivals conducted in the Bṛhadīśvara temple is also significant. Daily and periodical worships (including kumbhabhishekam) has been documented by the IGNCA and is integrated in this DVD. We have attempted to capture the change in the attitude towards the temple – through the interviews of the hereditary Trustee and Kittappa Pillai, an eminent musician and nattuvanar belonged to the 8th generation of lineage of artists at Tanjavur, in this DVD.

Several alterations and additions in structures, do reflect the growth, with time, and this has been shown with the timeline in this DVD. Recent techniques and tools have been utilized to integrate the information available in different art forms in an interactive manner for each navigation by the users. 360 degree panoramic views of the temple from selected locations are provided for the users.

This is the first time when such a project has been conceptualised and fulfilled, to make the ancient knowledge and achievements accessible through a modern multimedia platform, for the understanding of our past.

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know more about interactive multimedia DVD titled Tanjavur Brhadisvara Temple