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ṚGVEDĪYA SĀṄKHĀYANA RUDRĀDHYĀYA  (Vol. I & II)
 

Sampadak: Prakash Pandey

2009, vii+102, ISBN: 978-81-855-3-15-8, Rs. 320


 

भारतीय श्रौत एवं स्मार्त दोनों परम्पराओं में शिव आराधरा, वृषोत्सर्ग आदि अनेक याज्ञिक क्रियाओं में रुद्राध्याय का पाठ आदि काल से होता आ रहा है। नियमतः जो व्यक्ति वेद की जिस शाका में प्रतिपादित रुद्राध्याय का पाठ करना अनिवार्य होता है. ऋग्वेदीय रुद्राध्याय अभी तक एकमात्र शाकल-संहिता के पाठ के रूप में उपलब्ध था। पहली बार दक्षिण राजस्थान के बाँसवाड़ा जिले में नागर ब्राह्मणों के द्वार संरक्षित ऋग्वेद की शाख्ङायन शाखा का रुद्राध्याय प्रकाशित हो रहा है। प्रस्तुत रुद्राध्याय अन्य प्रसिद्ध रुद्राध्यायों से कई दृष्टियों से विशिष्ट तथा महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इससे एक सर्वथा प्राचीन पाठ एवं उसकी पाठ-परम्परा से पाठकों को परिचय प्राप्त होगा।। इसके प्रकाशन से निश्चत् रूप से वैदिक साहित्य, इतिहास एवं संस्कृत के प्रेमी, अध्येता एवं विद्यार्थी लाभान्वित होंगे।

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I

 

 





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