कल्चरल इन्फॉर्मेटिक्स में स्‍नातकोत्‍तर डिप्‍लोमा (पीजीडीसीआई)
एआईसीटीई द्वारा अनुमोदित

कल्चरल इन्फॉर्मेटिक्स अपने सभी विविध आयामों और सूचना प्रौद्योगिकी के साथ, कलाओं को संयोजित करता हुआ अध्‍ययन का एक उभरता हुआ क्षेत्र है। सांस्कृतिक सूचना विज्ञान का मुख्य उद्देश्य सांस्कृतिक जानकारी और मानस चित्रण को तेज करने के लिए सामग्री अन्वेषण प्रणालियों को डिजाइन और विकसित करना है। यह उसके लिए अनुसंधान, आधुनिक (डिजिटल) उपकरण, तकनीक और कार्यप्रणाली को प्रयुक्‍त करता है। यह सहस्राब्दी प्राचीन (पारंपरिक) ज्ञान प्रणाली को एक जीवंत वर्तमान (विशेष रूप से जीवित परंपराओं) के साथ एक बहुस्तरीय कंप्यूटर जनित मल्टीमीडिया में एकीकृत करता है। यह कला और सूचना प्रौद्योगिकी के विषयों के बीच उस  तरीके को प्रदर्शित करने के लिए तालमेल स्थापित करता है, जिस तरीके से सांस्कृतिक विरासत को लगभग पूरी तरह से फिर से प्रस्तुत किया जा सकता है। यहाँ यह उल्लेख करना समीचीन है कि प्रकृति द्वारा कंप्यूटर विज्ञान सामग्री को छोटे खंड़ों में न्‍यूनीकृत करता है और प्रकृति द्वारा संस्कृति उन्हें एकीकृत करती है। चूंकि डिजिटल सामग्री को जोड़ने के लिए मल्टीमीडिया एक शक्तिशाली उपकरण है, इसलिए यह अंतर और बहु​विषयक दोनों के संबंधों को प्रतिबिंबित करने के लिए सबसे उपयुक्त माध्यम है। सांस्कृतिक सूचना विज्ञान पर पाठ्यक्रम से न केवल कला के सिद्धांत और व्यावहारिक पहलुओं के बीच का अंतर कम होगा, बल्कि इससे मानव विकास के एक घटक के रूप में संस्कृति के समग्र ढांचे में कला की समझ भी सुसाध्‍य होगी। आईजीएनसीए में चयनित परियोजनाओं के माध्यम से हमारे प्राचीन ज्ञान और उपलब्धियों को मल्टीमीडिया प्लेटफॉर्म पर सुलभ बनाने का प्रयास किया गया है और इस प्रकार प्राचीन और आधुनिक दुनिया के बीच संपर्क स्थापित किया गया है।